भारतीय संविधान का इतिहास – History of Indian Constitution (UPSC, SSC, PCS, Railway) 2025

आज हमलोग भारतीय संविधान का इतिहास के बारे में जानेंगे ये टॉपिक काफी महत्वपूर्ण और आसान भी है जो आपकी परीक्षा में जरूर पूछा जायेग।

महारानी एलीज़ाबेथ -1 ने 31 दिसम्बर 1600 को पूर्वी इनिदा कंपनी को एक चार्टर (licence) प्रदान किया. चार्टर के तहत कंपनी को भारत मे व्यापर करने  का विशेष अधिकार दिया गया.

Regulating Act (1773):
  • बंगाल के गवर्नर – जनरल की सहायता के लिए 4 सदस्यो की परिसद का गठन .
  • पहला गवर्नर-गेनरल : Warren Hastings
  • बॉम्बे ओर मद्राश प्रेसएडेसी को बंगाल के अधीन के दिया .
  • कुलकुट्टा मे प्रथम उच्च न्यायालय के स्थापना (1774) मुख्य न्यायधीश, 3 अन्य  न्यायधीश.
  • स्वतंत्र भारत मे सुप्रीम कोर्ट के स्थानपन
  • 26 जनवरी 19950
  • उद्घाटन स्तर – 28 जनवरी 1950
  • इसने नौकरों को भारतीयों से कोई रिश्वत ओर उपहार लेने पर रोक लगा दी
  • निदेशक मण्डल अपने राजस्व नागरिक ओर सौन्य मामलों पर रिपोर्ट देगा
  • वारेन हेस्टइंग — बंगाल के अंतिम गवर्न + बंगाल के प्रथम गवर्न जनरल
  • स्वतंत्रता पश्चात भारत के प्रथम न्यायधिश  — न्यायामूर्ति हारीलाल कनिया केंद्रीकरण 1773 से शुरू हुआ ।
  • साँसोधन अधिनियम 1781
  • इसे रेगुलेटींग ऐक्ट 1773 के दोषों को सुधारने के लिए सेटतालमेंट ऐक्ट के नेम से जाना जाता है
  • गवर्न जनरल को और परिषद को सर्वोच्य न्यायाल के अधिकार क्षेत्र से छूट दी गई ।
  • पिटस इंडिया ऐक्ट, 1984
  • कंपनी के विभेदित वाणिजीयक और प्रशासनिक कार्य
  • इसमे प्रशानिक मामलों के प्रबंध के लिए नियंत्रण बोर्ड बनाया यही से दोहरी नियंत्रण प्रणाली शुरू हुई
  • इसे हाफ लोफ़ सिस्टम कहा गया क्योंकि इसका उददेश संसद और कंपनी के निदेशको के बीच मध्यस्थता करना था
  • पहली बार भारत मेँ कंपनी के क्षेत्रों को भारत में ब्रिटिश कब्जे कहा गया
  • पिटस इंडिया ऐक्ट का नाम विलियम पीट द यांगर के नाम पर रखा गया था

1793 का चार्टर अधिनियम  

  • इसने भारत में कंपनी के व्यापार एकधिकार को 20 वर्षों की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा दिया.
  • कमांडर – इन – चीफ को गवर्नर जनरल काउन्सल का सदस्य नहीं होना था जब तक की उसे इस प्रकार नियुक्त न किया जाए।
  • नियंत्राण बोर्ड के सदस्यों और कर्मचारियों को भारतीय राजस्व से भुगतान किया जाना था ।
  • 1813 का चार्टर अधिनियम  
  • इसने भारत में कंपनी के व्यापार अकाधिकार को समाप्त कर दिया और चीन के साथ चाय के व्यपार पर कंपनी के अकाधिकार को जारी रखा।
  • इसने भारत मे कंपनी में क्षेत्रो पर ब्रिटिश ताज की संप्रभुता का दावा किया.
  • इसने इसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए इसाई मिशनरियो को  भारत मे आने की  अनुमति दी.
  • भारतीय शिक्षा पर खर्च करने के लिए 1 लाख रुपये आवंटित किए।
  • राजपाल गवर्नर की कार्यकारी परिषद में एक विधि सदस्य को शामिल किया गया ।
  • इसने भारत में स्थानीय सरकारों को व्यक्तियों पर कर लगाने और ऐसा न करने पर व्यक्तियों को दंडित करने का अधिकार दिया।
  • भारत के प्रथम विधि आयुक्त थाउमस बबींगटन  मौकाले
1833 का चार्टर अधिनियम / सेंट हेलेना अधिनियम
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया
  • बंबई और मद्रास के गवर्नर गवर्नरो को उनकी विधायी शक्तियों से वंचित कर दिया गया ।
  • इसमें EIC की वाणिज्यिक संस्था के रूप में गतिविधियों को समाप्त कर दिया गया, यह विशेष रूप से प्रशासनिक संस्था बन गई। (चीन के साथ व्यापार पर रोकथाम समाप्त)
  • इसमें भारतीय कानूनों को सुव्यवस्थित और संहिताबद्ध करने के लिए भारतीय विधि आयोग की स्थापना का प्रस्ताव किया गया।
  • इसमें सिविल सेवाओं के चयन के लिए खुली प्रतियोगिता की प्रणाली शुरू करने का प्रयास किया।
    • IPC(भारतीय दंड संहिता) 1860 में शुरू किया गया। सिविल सेवा उन्हीं के द्वारा देने वाले प्रमुख व्यक्ति थे – सैडलर, मैकाले, बैंटनिक (1835)
1853 का चार्टर अधिनियम : भारतीय संविधान का इतिहास
  • गवर्नर जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को अलग किया गया।
  • इसके तहत विधायी परिषद के रूप में 6 नए सदस्यों को परिषद में शामिल किया गया।
  • इसमें सिविल सेवाओं के लिए खुली प्रतियोगिता शुरू की।
  • इसमें भारतीय क्षेत्रों में कंपनी शासन का विरोध किया, लेकिन अवधी निर्धारित नहीं की गई।
  • भारतीय विधायी परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व पेश किया गया।
  • गवर्नर जनरल की परिषद में 6 विधायी सदस्यों में से 4 सदस्य मद्रास, बॉम्बे, बंगाल और आगरा की स्थानीय सरकारों द्वारा नियुक्त किए गए थे।

तात्कालिक शासन:

  • भारत सरकार अधिनियम, 1858 (जिसे “रानी की घोषणा” के नाम से भी जाना जाता है।)
  • इस अधिनियम को भारत की असली सरकार के लिए अधिनियम के रूप में माना जाता है, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी का पतन कर दिया, और सरकार, सेना और राज्य की शक्तियों को ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया।

विशेषताएँ:

  • इसमें भारत के गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर भारत का वायसराय कर दिया। (लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने)
  • इसमें निर्देशक बोर्ड और निदेशक मंडल की समाप्ति कर दी गई और ब्रिटिश सरकार की मानी गई समाप्त कर दी गई।
  • इसमें भारत के लिए एक नया कार्यालय सचिव राज्य बनाया गया, जिसमें भारत के प्रशासन पर पूर्ण अधिकार और वायसराय के साथ 15 सदस्यीय भारत परिषद द्वारा सलाह प्रदान की गई।
    • 1858 (1857 के विद्रोह के बाद)
    • इसमें सुधारों को सुझाव दिया गया और ब्रिटिश सरकार ने सिपाहियों मात्र ही नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य व्यवस्था को पुनः डिजाइन किया।
भारत परिषद अधिनियम 1861 : भारतीय संविधान का इतिहास
  • भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया में जोड़ा गया।
  • 1862 में वाराणसी के महाराज, पटियाला के महाराजा और सिर दिनकर राव को विधान परिषद में नामित किया गया।
  • इसमें विधायी शक्तियों को बहाल करने की विकेंद्रीकरण प्रक्रिया शुरू की।
  • (बम्बई और मद्रास प्रेसिडेंसी में)
  • इसमें बंगाल, उत्तर-पश्चिमी प्रांत और पंजाब के लिए नई विधान परिषदों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया।1859 में कैनिंग द्वारा शुरू की गई “पोर्टफोलियो प्रणाली” की मान्यता।
  • इसने तायसराय को आपातकाल के दौरान विधान परिषद् की सहमति के बिना अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया (ऐसे अध्यादेश की अवधि ६ महीने थी )
भारत परिषद अधिनियम, 1909:
  • इस अधिनियम को “मार्ले-मिंटो सुधार” के नाम से भी जाना जाता है।
    • राष्ट्र सचिव → वायसराय

विशेषताएँ:

  • इसमें केन्द्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में प्रस्तावों की संख्या में वृद्धि की गई।
  • केन्द्रीय विधान परिषद की सदस्य संख्या 16 से बढ़ाकर 60 की गई।
  • इसमें केन्द्रीय विधान परिषद में सवर्णों बहुमत तथा प्रांतीय विधान परिषद में सवर्णों को बहुमत दिया गया।
  • इसमें भारतीयों को पहली बार निर्वाचित सदस्य पेश करने और प्रश्न पूछने की अनुमति दी गई।
  • इसमें मुस्लिमों को अलग निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की सुविधा दी गई।
  • मुसलमानों को उनके धार्मिक आधार पर प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला।
  • इसमें मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन (सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व प्रणाली) की शुरुआत की गई।
  • भविष्य में सदस्यों का चुनाव मुस्लिम मतदाताओं द्वारा किया जाना तय हुआ। (नतीजा – सांप्रदायिक निर्वाचन क्षेत्र के गठन)
भारत सरकार अधिनियम 1919 : भारतीय संविधान का इतिहास
  • इस अधिनियम को “मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार” के नाम से भी जाना जाता है।
    राष्ट्र सचिव → वायसराय
  • प्रशासन के सभी विषयों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया:
    1. केंद्रीय विषय
    2. प्रांतीय विषय
    इन्हें आगे दो भागों में विभाजित किया गया:
    हस्तांतरित विषय
    आरक्षित विषय
    गवर्नर जनरल उत्तरदायी नहीं था
    गवर्नर जनरल उत्तरदायी था
    सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्थानीय स्वशासन आदि
    पुलिस, न्याय प्रशासन, रोजगार, डाक-तार आदि
    इन विषयों को प्रादेशिक शासन के प्रांतों में लागू किया गया।
  • इसमें देश में पहली बार द्विसदनीय प्रणाली और प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत की गई।
  • जिसमें एक उच्च सदन (राज्य परिषद) और एक निम्न सदन (विधान सभा) शामिल था।
  • इसमें लंदन में भारत के लिए उत्तरदायी एक नया कार्यालय बनाया गया और सचिव को उसी उत्तरदायी ठहराया।
  • सिविल सेवा में भर्ती के लिए 1926 में रॉयल कमीशन (लीटन आयोग) की स्थापना की गई।
  • इसमें प्रांतीय बजट को केंद्रीय बजट से अलग कर दिया।
  • कई विभागों, प्रशासनिक सेवाओं, रेलवे, ब्रिटिश और यूरोपीय लोगों के लिए पूर्ण निर्वाचन प्रणाली का विस्तार किया।
भारत सरकार अधिनियम 1935 (1 अप्रैल 1937 को लागू)
  • इसमें प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया और केंद्र में द्वैध शासन लागू किया गया।
  • इसमें एक भारतीय प्रशासनिक संघ की स्थापना का प्रस्ताव था, जिसमें प्रांत और रियासतों (Native States) को संघ में शामिल किया जाना था।
  • इसमें 11 में से 6 प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था लागू थी।
  • इस प्रकार, बंगाल, बॉम्बे, बिहार, असम और संयुक्त प्रांत की विधानसभाओं को द्विसदनीय बना दिया गया।
  • (द्विसद – एक विधान परिषद [उच्च सदन] और एक विधान सभा [निम्न सदन])
  • इसमें अनुसूचित जातियों, महिलाओं और मजदूरों के लिए कुछ विशेष आरक्षण की व्यवस्था की गई।
  • सभी वयस्क मतदाताओं को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया।
  • पूर्ण वयस्क मताधिकार के केवल 14% को ही वोट देने का अधिकार था।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की गई।
  • संघीय लोक सेवा आयोग, प्रांतीय लोक सेवा आयोग और संयुक्त लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया।
  • संघीय न्यायालय की स्थापना 1937 में हुई थी।
  • बर्मा (अब म्यांमार) को भारत से अलग किया गया।
  • इसमें केंद्र और प्रांतों की कार्यसूची को दो भागों में बाँटा गया:
  • संघीय सूची (केंद्र के लिए – 54 विषयों के साथ)
  • प्रांतीय सूची (प्रांतों के लिए – 36 विषयों के साथ)
  • समवर्ती सूची (दोनों के लिए – 36 विषयों के साथ)
  • ब्रिटिश गवर्नर जनरल (लॉर्ड लिनलिथगो, लॉर्ड वावेल, लॉर्ड माउंटबेटन) को विशेष शक्तियाँ दी गईं।
  • इसमें 15 सदस्यों की परिषद को समाप्त कर दिया गया।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947: भारतीय संविधान का इतिहास

20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि
भारत में ब्रिटिश शासन 30 जून 1948 तक समाप्त हो जाएगा।
इसके बाद सत्ता क्रमबद्ध रूप से भारतीयों के हाथों में सौंपी जाएगी

विशेषताएँ:

  • इसमें भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त कर दिया गया और
    15 अगस्त 1947 से भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र घोषित कर दिया गया।
  • शासन का विभाजन किया गया और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) से अलग होते ही अधिकारों के साथ भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र प्रभुत्व का निर्माण किया गया।
  • इसमें वायसराय के “पद” को समाप्त कर दिया गया और एक गवर्नर जनरल नियुक्त किया गय जिन्हें ब्रिटिश राजा जॉर्ज VI द्वारा नियुक्त किया गया। (भारत के लिए पहला गवर्नर जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन)
  • इसमें भारत के लिए राष्ट्र सचिव के कार्यालय को समाप्त कर दिया गया और उसके कार्यभार को भारतीय मंत्रिमंडल में स्थानांतरित कर दिया गया।
  • इसमें 15 अगस्त 1947 को शासकीय रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोपरिता और संधियों को समाप्त कर राज्यों से संबंधित सभी समझौतों को रद्द करने की घोषणा की।
  • शासकीय रियासतों को यह निर्णय लेने का अधिकार था कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल होंगे या फिर स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रहेंगे।
  • भारत के राज्यों के प्रमुख को अब “राजप्रमुख” के नाम से किसी भी विदेशी संप्रभु देश को
  • पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
  • इसमें भारत के गवर्नर-जनरल और प्रांतीय गवर्नरों को राज्यों के निर्वाचित (नामांकित) प्रमुख के रूप में नामित किया गया।
  • इसमें भारत के लिए राष्ट्र सचिव द्वारा सिविल सेवाओं में नियुक्त और पदों के आरक्षण को समाप्त कर दिया गया।
  • ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया और भारत व पाकिस्तान दो नए स्वतंत्र डोमिनियन बनकर अस्तित्व में आ गए।
भारतीय संविधान का इतिहास - History of Indian Constitution (UPSC, SSC, PCS, Railway)

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